सुशांत सिटी अजमेर को लेकर बड़ा फैसला
*‼️सुषांत सिटी अजमेर को लेकर बड़ा फ़ैसला‼️*🙋♂️
_*अब बिल्डरों की “मनमानी साम्राज्य” पर ताला लगने का आ गया है वक़्त!*_🤨
*✍️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*भारत में रियल एस्टेट सेक्टर वर्षों से एक ऐसे जंगल की तरह रहा है जहाँ बिल्डर खुद को शेर मानते रहे और उपभोक्ता को बकरी लेकिन सुषांत सिटी, गेगल, अजमेर पर आया यह फैसला पहली बार बताता है कि अब न्यायालय उस जंगल का असली राजा है और शेरों के पिछवाड़े पर भी डंडा चलता है। फ़ैसले की प्रति देख कर लगता है कि सपने बेचकर भाग जाने वाले बिल्डरों का ‘टाइम-अप’ हो चुका है।*🙋♂️
*सुषांत सिटी में जो हुआ, वह सिर्फ उपभोक्ताओं का शोषण नहीं था बल्कि यह सपनों की खुली लूट थी।*🫢
*सुरक्षा नहीं! पार्क नहीं! सड़कें नहीं! पानी नहीं! लेकिन मेन्टेनेंस की रसीदें❓समय पर। पूरा हिसाब। पूरा अत्याचार।*😱
*कोर्ट ने इस बार बिल्डरों को वही जवाब दिया है जिसकी सालों से जरूरत थी। “पहले सुविधाएँ दो, फिर पैसों की बात करना। अभी नहीं चलेगा यह ठगी का मॉडल।”*🥺
*यह सुनना उन कंपनियों के लिए भारी है जो आधी कॉलोनी बेचकर खुद को ‘इंफ्रास्ट्रक्चर का सुल्तान’ समझने लगी थीं। अंसल प्रॉपर्टीज पर क़ानून की इस चोट के बाद अब बहानों की जगह बची नहीं है।*🙄
*अगर रियल एस्टेट कंपनियों की हालत यह है तो सुविधाएँ देने की उम्मीद बेमानी ही थी।यह पूरा सिस्टम शायद विकास नहीं,“अव्यवस्था का कारोबार” चला रहा था। लेकिन अब अदालत ने साफ कह दिया है कि नाम बड़ा हो या पद, क़ानून सबको बराबर ठोकता है। इस फैसले में उपभोक्ता को पूरा मुआवजा, कानूनी खर्च और राहत मिली है। यह सिर्फ मुआवज़ा नहीं बल्कि बिल्डर माफिया पर कसा हुआ नियंत्रण है।*🤨
*अदालत के फ़ैसले से पहली बार बिल्डरों को यह संदेश मिला है कि“उपभोक्ता अब चुप नहीं है। अदालत उसके पीछे खड़ी है।”*👍
*देश भर के बिल्डरों के लिए यह फैसला मौत की घंटी है। जो बिल्डर अब भी सोचते हैं कि अधूरी कॉलोनी चल जाएगी। नक्शा-रहित निर्माण स्वीकार हो जाएगा।पानी-सड़क-पार्क वादे सिर्फ कागज़ी रहेंगे और उपभोक्ता पैसे देकर भीख मांगता रहेगा। ऐसा अब नहीं होने वाला। ❌*
*यह फैसला बताता है: अब ‘सब चलता है’ संस्कृति खत्म हो चुकी है। भारत में बिल्डरों के लिए सबसे बड़ा बहाना होता था*
_*“साहब काम चालू है… जल्द दे देंगे… प्रक्रिया में है…”*_🙋♂️
*कोर्ट ने इस झूठ की चादर खींचकर फेंक दी है।अब जवाबदेही ही चलेगी। अधूरी सड़कें, कच्चे वादे और झूठी मीटिंगें नहीं चलने वाली।*❌
*सुषांत सिटी फैसला एक वकील का तर्क या उपभोक्ता की जीत भर नहीं यह पूरे रियल एस्टेट सेक्टर पर कड़ा प्रहार है। सुषांत सिटी का फैसला वह दस्तक है जो देश के हर बिल्डर के दरवाज़े पर सुनाई देनी चाहिए।*👍
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